देवता और नायक
ह्यमिर

नॉर्स पौराणिक कथा

ह्यमिर

थोर का अनिच्छुक साथी और कढ़ाई का रक्षक

परंपरा
नॉर्स पौराणिक कथा
समूह
योत्नार
इनमें आता है
थोर और जगत-नाग

ह्यमिर एक प्रचंड समुद्री दैत्य है, एक मील गहरी विशाल कढ़ाई का स्वामी, जिसकी देवताओं को आएगिर के भोज के लिए मदिरा तैयार करने हेतु आवश्यकता होती है। उसका पुत्र टीर, थोर को उसे लाने के लिए ले जाता है। ह्यमिर अनमने भाव से उनका आतिथ्य करता है, और रात्रिभोज में थोर उसके दो बैल खा जाता है, इसलिए दैत्य उसे और भोजन के लिए नौका खेने ले जाता है। बैल के सिर को चारे के रूप में प्रयोग कर थोर स्वयं योर्मुनगांद्र को फँसा लेता है और तड़पते विश्वसर्प को नौका के किनारे तक खींच लाता है; भय से ह्यमिर रस्सी काट देता है, और सर्प पुनः गहराई में डूब जाता है। फिर भी थोर कढ़ाई जीत लेता है, और बाहर निकलते समय दैत्य के अपने ही पथरीले मस्तक पर ह्यमिर का मद्यपात्र चकनाचूर कर देता है।

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